राजस्थान के करौली से लेकर कालूड़ी तक दलितों पर जुल्म, फिर एक दलित को जिंदा जलाया

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दिनेश बालाच की रिपोर्ट-

बाड़मेर– राजस्थान को दलितों का कत्लखाना बनाया जा रहा है। कुछ दिन पहले करौली जिले का गाँव इनायती में घर मे सो रहे एक दलित को जिंदा जलाया गया है। इस गाँव मे एकमात्र खटीक समाज का एक ही परिवार रहता है। गांव के सामन्तवादी दबंगो के द्वारा भरोसी लाल के बेटे से रास्ते मे छोटी सी तू तू मैं मैं के चलते दबंगो के द्वारा एक राय होकर भरोसी लाल के घर के ऊपर रात को 1 बजे के आस पास हमला दिया। तथा घास फूस के बने झुपे को आग के हवाले कर दिया। जिसमे में सो रहे मोनू उम्र 25 वर्ष को जिंदा जला दिया। उपचार के लिए जिला करोली के राजकीय अस्तपताल में ले जाया गया। लेकिन मोनू को वहाँ से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्तपताल के लिए रेफर कर दिया और 2 अक्टूबर को आखिर मोनू मौत से लड़ते लड़ते लड़ते हार गया।
मोनू के पिता भरोसी लाल खटीक के द्वारा थाना सपोटरा जिला करौली में 4 अक्टूबर को नामजद FIR दर्ज कराई है। जिसका एफआईआर नम्बर 0216 है। भादस की धारा 143, 323, 341, 436, 459, 302, 3(1)( s), 3(2)(v) के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आज दिन तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नही है। और तो और भरोसी लाल बहुत गरीब परिवार से है। जिसकी दयनीय हालत बहुत हालत खराब है। ऊपर से सामन्तों के द्वारा एक जवान बेटे को आग के हवाले कर दिया। सब कुछ राख होने के बाद भी प्रशासन के द्वारा कोई भी आर्थिक सहयोग नही किया गया। ये पीड़ित परिवार इतना बेबस हो गया है कि अब उसका रहने के लिए कोई सहारा है। आसमान के नीचे खुले में रह रहे है। प्रशासन कोई सुध नही ले रहा है। आखिर प्रशासन कभी भी दलितों का हमदर्द नही रहा है। उसको न्याय के लिए सड़कों पर आकर चिल्ला चिल्ला कर न्याय माँगने को मजबूर किया जाता है।
अपुष्ट सूत्रों के अनुसार सुनने में आ रहा है कि पीड़ित परिवार को जहाँ उसने मामला दर्ज कराया था वहाँ का SHO उसको थाने बुलाकर कई कई घंटे बैठाकर रखा जाता है। उल्टा पीड़ित परिवार को परेशान किया जा रहा है। ऐसे पीड़ित दलित परिवारों का सब कुछ उझड़ने के बाद भी उनको न्याय दिलाने के लिए कोई आगे नही आ रहा है।
खटीक समाज युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राज सामरिया कहते है कि पुलिस प्रसाशन के द्वारा FIR में नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करे, साथ ही पीड़ित भरोसी लाल के परिवार को अब और भी जान माल का खतरा बढ़ गया है, इसलिए पीड़ित परिवार डर के साये में पल रहा है। अगर पीड़ित के साथ आगे भी अनहोनी घटना घटित होती है तो उसका जिम्मेवार स्थानीय प्रसाशन की रहेगा।
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि मानवधिकार व सामाजिक संगठनों को आगे आकर दलित परिवार को न्याय दिलाने की पहल करनी चाहिए। ज़िला प्रशासन करौली के द्वारा पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक सहयोग किया जाय व रहने के लिए पुख्ता इंतजाम का जल्द इंतजाम किया जाए। साथ ही SC व ST आयोग व मानवधिकार आयोग को इस का संज्ञान लेना चाहिए।

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