जुनून के साथ संगीत का निर्माण

0
110

-विशेष संवाददाता

गुलशन सुमन की दूसरी वीडियो एलबम “मैं तेरे कुर्बान” जो की उनके लिए एक मील का पत्थर है जिसमे भारतीय संगीत तथा पाश्‍चात्‍य संगीत का मिला जुला मिश्रण है। गुलशन जो कि सेक्‍टर 22 गुड़गाँव के रहने वाले हैं अपने संगीत के ज्ञान तथा संगीत के जुनून को पूरा करने का श्रेय अपने गुरुओं को देते हैं यद्यपि उन का काम संयुक्त महाप्रबंधक (वायु यातायात नियंत्रण) भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण में है, भी उनके संगीत के प्रति जुनून को नहीं रोक पाया।

उनके मन में संगीत के प्रति रुचि बचपन से ही थी और समय के साथ साथ यह रुचि जुनून बनता चला गया। सुमन कहते हैं  “मैं हमेशा से संगीत के वाद्य यंत्रों के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानने का उत्‍सुक रहा एवं भारतीय संगीत को सीखने के लिये हमेशा से मन के एक कोने में एक ललक बनी रही। यही एक कारण था‍ कि वे अपने स्कूल और कॉलेज के समय गर्मियेां की छुट्‍टीयों में मैं हमेशा अपने ताऊ जी ज्ञानी गुरुबचन सिं‍ह के घर पंजाब में गुज़ारा करता था। मेरे ताऊ जी  पंजाब के प्रसिद्ध उस्‍ताद मंलंग के शिष्‍य थे। भाग्‍यवश वो मेरे भी पहले गुरु रहे। मैंने भारतीय संगीत के  बुनियादी संगीत वाद्य यंत्र, जैसे हारमोनियम, तबला, ढोलक एवं बांसुरी बजाना उन्‍हीं से सीखा।”

चूंकि उनका स्‍कूल दिल्‍ली में था इसलिये वे अपने ताऊ जी के साथ नियमित रुप से संगीत नहीं सीख सके। पर संगीत सीखने की ललक उनके अन्‍दर बराबर बनी रही और समय के साथ साथ और मजबूत होती चली गई।

वो कहते हैं “जब मै ग्‍यारवीं कक्षा में पडता था तब मेंने बनारस घराने के पंडित कृष्‍णदत्‍त शर्मा के बारे में जाना। वे सरोजनी नगर में रहते थे जोकि मेरे घर मोती बाग से काफी नजदीक था। मैंने उनसे हिन्‍दुस्‍तानी शास्त्रीय स्‍वर संगीत सीखाने का अनुरोध किया, मेरी लग्न देखने के बाद उन्होने मेरा अनुरोध स्वीकार किया। उन्‍होने मुझे तीन-चार साल तक सिखाया जब तक कि वे ए॰ जी॰  सी॰ आर॰ एन्‍क्‍लेव, पूर्वी दिल्‍ली में रहने के लिये नहीं चले गये। कुछ समय तक मुझे अपनी संगीत की शिक्षा को विराम देना पडा, क्‍योंकी मेरे लिये रोजाना पूर्वी दिल्‍ली जाना बहुत मुश्किल था।”

गुलशन सुमन जब जी.बी. पन्‍त पॉलीटेक्‍निक महाविधालय से यांत्रिक इंजीनियरिंग में डिप्‍लोमा कर रहे थे तो वे मुशाहिद हुसैन खान के संपर्क में आए जो कि उस्‍ताद सरफराज हुसैन खान साहब के बेटे थे, उस्‍ताद सरफराज हुसैन खान साहब रामपुर सहसवान घराने जाने माने गायक थे। सुमन कहते हैं “मेरे अनुरोध और लग्न को देखते हुए  उस्ताद सरफराज हुसैन खान साहब मुझे गायन संगीत की शिक्षा देने के लिए राज़ी हो गए तथा उनसे तराना गायकी भी सीखी। सुमन ने अपना भाग्‍य दूरदर्शन तथा ऑल इंडिया रेडियो में भी अपना भाग्‍य आजमाया।”

वे कहते हैं “मैंने अपना ऑडिशन ऑल इंडिया रेडियो पर दिया तथा मुझे ग़ज़ल गायन तथा भारतीय सुगम संगीत कार्यक्रम गाने के  लिये चुन लिया गया। बाद में मेने दूरदर्शन पर भी ग़ज़ल के कार्यक्रम दिये। मेरे गायन के प्रदर्शन ने मुझे और अधिक कढी मेहनत करने के लिये प्रेरित किया। मेरे गाए हुए गानों की पहली विडियो एल्बम चुनर मोरी रंग डारी 2011 में रिलीस हुई जिसको आध्‍यात्‍मिक चैनल “आस्‍था भजन” पर भी प्रसारित किया गया।”

गुलशन का मुम्‍बई स्‍थानातंरण होने के पश्‍चात इन्‍होने वेदान्त दर्शन के बारे में जानने के लिये स्‍वामी पार्थसारथी के सानिध्य में सीखने का अवसर प्राप्त हुआ, जिनकी लोनावला में वेदान्त अकादमी है।

“मैं जब भी वेदान्त अकादमी में जाता था तो स्वामी जी मुझे भजन गायन के लिए आमंत्रित किया करते थे। जो मैनें वहां पर सकारात्‍मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई उससे मुझे अपनी स्वयम की स्वर बद्ध की हुई रचनाओं से बनी  हुई एलबम रिलिज करने की प्रेरणा मिली और सन् 2011 में उनकी पहली विडियो एल्बम “चुनर मोरी रंग डारी”  रिलिज हुई।  मैंने इस एल्बम में कबीरदास, सूरदास, मीराबाई , दादू दयाल जी के भजन शामिल किये।”

सुमन कहते हैं “अपनी दूसरी एलबम मैं तेरे कुर्बान के गाने युवाओं की पाश्‍चात्‍य संगीत की  पसंद को ध्‍यान में रखते हुये कम्‍पोज किये गये। इस एलबम के गानों का राग हिन्‍दुस्‍तानी है जबकि धुन पाश्‍चात्‍य है। कुछ गानों में मेंने रॉक का तडका लगाया परन्‍तु गाने के मूड के साथ बिना कोई समझोता किये। इस एलबम का शीर्षक बाबा बुल्‍ले शाह के द्वारा लिखा हुआ एक गाने से लिया गया है। इस एल्बम के कुछ गाने मैंने यू-ट्यूब पर भी पोस्‍ट किये हैं। इन गानों को बहुत ही अच्‍छी प्रतिक्रिया यू ट्यूब के दर्शकों की तरफ से मिली है। इस एलबम के आठ गानों में से मेने तीन गाने लिखे हैं।”

फिर कुछ समय बाद में उनकी दो और आडिओ एल्बम भक्ति में शक्तिईश्वर की पुकार रिलीस हुई हैं जिसमें उकने पहले गाए हुए भजन पुनः प्रस्तुत हैं ।

संयोगवश, गुलशन सुमन की मुलाक़ात बॉलीवूड के प्रख्यात संगीतकार स्व0 मदन मोहन के असिस्टेंट पंडित गिरीश चन्द्र जी से हुई, जिनसे उन्होने फिल्म संगीत की बारीकियाँ सीखने का अवसर मिला। पंडित गिरीश चंद्रा जी के निर्देशन में उनकी भजन एल्बम “एक तलाश” रिलीस हुई, इस एल्बम के कई भजन “संस्कार टीवी”, सत्संग टीवी” पर भी लगातार टेलीकास्ट हो रहे हैं तथा यू ट्यूब पर बहुत सराहे गए हैं। पंडित गिरीश चंद्रा जी के संगीत निर्देशन में गुलशन की ग़ज़लों की एल्बम भी रिलीस हुई है जिसको Youtube पर हजारों likes मिले है।

सुमन कहते हैं  “मुझे संगीत की दुनिया में अभी एक लम्‍बा सफर तय करना है। भविष्‍य में,  मैं अपने स्‍वंय के गाने लिखने की सोच रहा हॅुं। मेरा लक्ष्‍य समाज को एक अच्छा संगीत देना है जिसमें भारतीय संगीत तथा पाश्चात्य संगीत का समन्वय हो जिससे आज के युवा को पाश्चात्य संगीत और भारतीय संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृति की ओर प्रेरित करना है।”

Share This On
loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here