ज्योतिषीय उपायों का सच

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ज्योतिष में समस्याओं के समाधान को लेकर वर्तमान समय में जो उपाय कराये या बताये जा रहे है उससे समाज में कुछ भ्रांतियाँ और अंधविश्वास बढ़ता जा रहा है। समाज का एक बड़ा वर्ग इसे अंधविश्वास का दर्जा दे रहा है । ज्योतिष को इन भ्रांतियों से केसे बचाया जाय? इसके बारे में चर्चा करना आज जरुरी हो गया है ।
मेने अपने पांच वर्ष के निरंतर अध्ययन में बहुत कुछ विचित्र बात पायी। मेने वृहत धेय शास्त्र, लघु पराशय, फलदीपिका , उत्तर कालामृत , भावार्थ रत्नाकर और ज्योतिष रचनाकार आदि शास्त्रों का अध्ययन किया।  कुछ उच्च कोटि के ज्योतिष आचार्यो के वाक्यों को वेदों पर, वृह्त जातक, मानसागरी, सरावली आदि पर बड़ी गंभीरता से सुना और पढ़ा।  मेने सी० वी० रमन द्वारा लिखित पुस्तक जातक निर्णय का भी अध्ययन किया परन्तु इन पुस्तकों में उपाय सम्बन्धी कोई बात नहीं पाई। मेरा अनुभव छोटा हो सकता है परन्तु उपाय और इतने तरीको के उपाय हमारे समाज में कहाँ से और किस अनुसन्धान केंद्र आदि से उत्पन्न हुए यह कही से पता नहीं चलता है । हाँ कुछ  भारतीय पंचांग में उपाय जरुर बता दिए गये है। वहां ग्रहों की शांति के मन्त्र, व्रत और उसके पूजन के विषय में भी बताया गया है। पंचांगों में रत्न धारण , जड़ धारण आदि  विधियों  की चर्चा देखने को मिलती है । इनके उपायों को फल की सटीकता एवं कारगरता कितनी है यह अभी भी संशय का विषय बना हुआ है। क्या इन उपायों से परेशानियाँ खत्म होती है? इन उपायों का क्या वैज्ञानिक  आधार है ? यह मूल प्रश्न ज्योतिष के सामने आज भी प्रासंगिक बना हुआ है। आज कोई ज्योतिष आचार्य इन पर ईमानदारी से बात नहीं कर रहा है और ना ही समाज को इसकी सच्चाई से अवगत करा रहा है ।
एस सन्दर्भ में यह बहुत स्पष्ठ रूप से कहना चाहता हूँ कि ज्योतिष भाग्य को बदल नही सकता है यह व्यक्ति के कर्म पथ को बताता है। व्यक्ति वैसे ही कर्म करता है जेसे उसके विचार होते है । अत: व्यक्ति अपने विचारो में परिवर्तन ला कर और समय पर किये  हुए कर्म के द्वारा भाग्य में कुछ बदलाव ला सकता है। हमारा भाग्य हमारे विचारो और कर्मो पर निर्भर होता है न की ज्योतिष पर । हमारे विचार और कर्म केसे होंगे यह देशकाल, परिस्थिति और पात्रता पर निर्भर करता है यहाँ पर कर्म का महत्व ही श्रेष्ठ है विचार,देश काल, परिस्थिति और पात्रता सहायक के रूप में कार्य करते है।  अत: कर्म से ही भाग्य बनता है ।
इस तथ्य को और गंभीरता से समझने  के लिए हम एक उदाहरण ले सकते है। जेसे कल सुबह ट्रेन के द्वारा किसी अमुक व्यक्ति को मुरादाबाद स्टेशन से लखनऊ की यात्रा करनी हो । ट्रेन का समय सुबह 11 बजे प्रस्थान करने का है यदि हमे सुबह करीब एक घंटा पहले अपने घर से स्टेशन को निकलने से पहले पता चल जाये कि ट्रेन 3 घंटा देरी से आएगी तो हम बचे 3 घंटे में कोई दूसरा आवश्यक कार्य कर सकते है या फिर घर पर रहकर आराम कर सकते है । इससे हम शारीरिक और मासिक परेशानियो से बच सकते है ।
कहने का तात्पर्य यह है कि यदि हमे घटनायो के घटित होने का समय पूर्व में पता चल जाये तो हम अपने कार्यो में कुछ सुधर कर सकते है। मेरी अपनी समझ से यही सही और कारगर उपाय है। हाँ मेरा रत्न धारण पद्धति की तरफ थोडा झुकाव जरुर है परन्तु युद्ध रत्न का मिलना बहुत ही दुर्लभ होता है। यह बहुमूल्य होता है और इसकी प्रमाणिकता भी बहुत कठिन है। हाँ मेरा मानना यह भी है कि विद्वानों की संगत से भी जीवन में परिवर्तन लाया जा सकता है। ईश्वर की भक्ति से मासिक दुखो का नाथ, मन प्रसन्नऔर शरीर स्वस्थ होता है। ऐसा मेरा  विश्वास है  परन्तु यह एक अलग विषय है।
-डॉ० राकेश कुमार यादव 
शिक्षक एवं ज्योतिषीय
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