आलेख: क्या आपके बच्चे भी कार्टून देखते हैं?

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चिंता नहीं चिंतन करिए ! ध्यान रखिये और बच्चों कि खुशहाली को बढ़ाएं !

-अमित सहगल-

आप और हम टी वी क्यों देखते है? क्योंकि यह एक मनोरंजन के साधन है ये हमने रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ हल्कापन लाते हैं। बच्चे भी टी वी अपने मनोंरजन के लिए देखते हैं उसमे कार्टून फन और एंटरटेनमेंट से भरपूर होते हैं। हम बच्चों को इसके लिए टोकते हैं और गुस्सा करते हैं, असल में उन्हें इन कार्टून चैनल से बेहत रंगीन कला कृतियां, मीठी-मीठी आवाजें, सुन्दर और हरे भरे नज़ारे दीखते हैं जो उन्हें अपनी और आकर्षित करतें हैं कभी तो उड़ते उछलते-कूदते बच्चे और उनके प्यारे कार्टून करैक्टर दीखते हैं कुछ हद तक यह नुक्सान देहक भी नहीं क्योंकि बच्चा इससे देख बहुत हसंता है। यही वजह है की नर्सरी राइम भी कार्टून पर आधारित बनती है इससे बच्चा जल्दी सीखता है और उनके हाओ-बाहो अपनता है एक्शन करता है। कार्टून देखने के कईं सकारात्मक प्रभाव है जैसे : –

कल्पना शक्ति को बढ़ावा – हम जानते है कि कार्टून्स असल जिंदगी से बहुत अलग दर्शाये जाते है यही बच्चों कि कल्पना की नब्ज को पहचान मिलती है डिज्नी क्लब के कार्टून तो बहुत कुछ सीखते है जिससे बच्चों को सोच कर कहना सीखने में मदद मिलती है।

उपलब्धि की भावना – ऐसे कितने कार्टून दिखाए जाते हैं जिसमे कार्टून करैक्टर बहुत मेहनती होता है अपने घर में काम करता है, मम्मी-पापा कि बात सुनता है और कहना मंटा है और पढाई में भी होशियार होता है, अपना होमवर्क समय से करता है, बाहर खेलने भी जाता है और वह सब काम करता है जो एक बच्चे को सीखने और करने का आप और हम जैसे अभिभावक सोचते हैं। कुछ भी हो इससे बच्चों में उपलब्धि की भावना जागरित होती है और कुछ करने का उत्साह बढ़ता है बस हमने ऐसे कार्टूनस के समय और नाम कि फहरिस्त बनानी है और अपने बच्चे को इसे देखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

स्वस्थ रखता है – कार्टून्स बच्चों के उन्हें स्वस्थ रखने में भी सहायक है कैसे? कार्टून्स देखते वक़्त बच्चा खूब हँसता है – खिलखिलता है खूब माजे लेता है क्योंकि उसका प्रिय कार्टून करैक्टर हंस रहा है वह उसकी हरकतों का अनुसरण भी करता है हम जानते हैं कि खुल के हंसना सेहत के लिए कितना सहायक होता है आपका बच्चा ऐसे में तरो-तज्जा महसूस करेगा। कभी कभी कार्टून करैक्टर बच्चों को कहना खिलाने में भी सहायक होते हैं जैसे पोपए स्पिनच (साग) खाता है और शक्तिशाली बन जाता हैं कोई भी काम आसानी से करता हैं यह बच्चों को दिखाया और सिखाया जा सकता हैं। कार्टून चरक्टेर्स को ज्यादातर अच्छी बॉडी और एक्टिव दिखाया जाता हैं यह हम अभिभावकों के लिए सहायक हैं।

नई चीज़ें सीखना – कार्टून्स से बच्चा काफी कुछ नया सीख सकता हैं साइंस के छोटे – छोटे प्रयोगों खुद कर सकता हैं बच्चों को उनकी किताबें इतना नहीं लुभाती जितना कि वीडियोस या कार्टून करैक्टर। इस्सलिये स्कूल में भी ऑडियो-वीडियो टूल्स कि सहायता से पढ़ाया – समझाया जाता हैं यह कार्टून्स जब सीखने के साथ मनोरंजन एक बच्चे को पढ़ाने के लिए अच्छा संयोजन है।

पारिवारिक संबंध – कार्टून श्रृंखला में, बच्चों के पास अपने परिवार होते हैं, जिसमें वे दिखाते हैं कि वे कैसे जुड़े रहते हैं, लड़ते हैं और फिर से मिलते हैं, कैसे दोस्त अपनी दोस्ती और बहुत कुछ कहते हैं पर फिर भी मिल कर रहते हैं। यह सब बच्चों पर अच्छा प्रभाव डालता है जब यह उनके परिवार और दोस्तों के साथ उनकी वफादारी की बात करता है।

लैंग्वेज बिल्डिंग – कार्टून्स बहुत ही आश्चर्यजनक रूप से, अच्छी शब्दावली भी बच्चों में विकसित करते हैं जिसे वे बहुत बार उपयोग करना शुरू कर देते हैं क्योंकि वे इसे बहुत बार सुनते हैं। बच्चे इसे एक नाटक की तरह अपनाते हैं जब वे अपने पसंदीदा कार्टून चरित्रों के साथ ही बात करते हैं।

कार्टून देखने का अपना मज़ा और लाभ हैं परंतु बच्चों को लुभाने वाला यह कार्टून जब एक नशा बन जाता है तब बात अलग होती है।

जैसा कि मैंने इन कार्टूनस के सभी सकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की, यहाँ कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं जिनका हमें ध्यान रखना चाहिए –

कम शारीरिक गतिविधियाँ – कार्टून के नशे के कारण वे अधिक समय घर के अंदर बिताते हैं। वे बाहर खेलने के उत्साह को कभी समझ ही नहीं पाते। बाहर जाकर खेलने से उन्हें प्रकृति को समझने का मौका मिलता है तथा इससे वे सक्रीय और ऊर्जावान बने रहते हैं। कार्टून इस तरह भी बच्चों को प्रभावित करते हैं।

सीख: कार्टून चरित्र पारस्परिक व्यवहार, सीखने और सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करते हैं। बच्चे कई मामलों में वयस्कों की तुलना में कार्टून पात्रों के साथ अधिक आसानी से जुड़ते हैं और पाठों को अधिक तत्परता से बनाए रखने की प्रवृत्ति रखते हैं।

आक्रामकता: कई कार्टून आक्रामकता का हिस्सा भी दिखाते हैं। यदि श्रृंखला के नायक नहीं हैं, तो बहुत सारे नकारात्मक चरित्र हैं जो आक्रामक भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, डोरेमोन में, उनका एक पात्र है जिसका नाम ‘ज्ञान’ है जो हमेशा हिंसा और बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है । श्रृंखला में निभाए गए नकारात्मक और सकारात्मक पात्रों के बीच अंतर को समझने के लिए वे बहुत छोटे हैं ।

चिकित्सा समस्याएं: बिना किसी ब्रेक के टीवी देखने वाले कार्टून के सामने ज्यादातर समय बिताने से स्वास्थ्य संबंधी खराब समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें आंखें, सिरदर्द, अधिक वजन आदि शामिल हो सकते हैं। कार्टून श्रृंखला देखने की वजह से ध्यान न आना एक और समस्या है। प्रभावों के बावजूद, बच्चों के पास एक संतुलित जीवन शैली होनी चाहिए जिसमें व्यायाम और बाहरी गतिविधि शामिल हो।

किसी भी मामले में, हम अपने बच्चों को कार्टून देखने के लिए कार्टून चैनलों या कार्यक्रमों की बात करना है। हम हमेशा नज़र रख सकते हैं कि वे क्या देख रहे हैं और वे इस पर कैसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अभी बस उन्हें कार्टून के साथ-साथ उनके बचपन का आनंद लेने दें और हम उन सभी का हिस्सा बनना पसंद करते हैं जो उनके साथ हैं !!!

इस लेख में कही गयी बातें व्यक्तिगत हैं इसका किसी कि जिंदगी पर पड़े प्रभाव से कोई समानता नहीं हैं न यह ऐसे किसी उद्देशय से लिखा गया। यह लेख बच्चों कि दुनिया और उनकी खुशियों के बीच सामंजस्य बैठना हैं। यह एक नकारात्मक सोच के परिदृश्य में सकारात्मक पहलू को दिखना हैं। इस बात का भी ध्यान रखें कि कभी आप बच्चे को कार्टून्स से दूर रख तो लेंगे पर अपने साथ बैठाकर वयस्क धारावाहिक शो देखने के लिए तैयार न कर लें। यह उनके लिए और भी दुष्परिणाम साबित हों।

(लेखक अमित सहगल प्रधानाचार्य, द स्कॉलर्स वैली, शिक्षाविद, लेखक, वक्ता और ब्लॉगर हैं और वर्ष 2018 के सर्वश्रेष्ठ प्राचार्य पुरस्कार और सबसे अनुभवी प्राचार्य के प्राप्तकर्ता एवं भारतीय खेल अकादमी संघ (एसपीएए – भारत) के माननीय सलाहकार हैं.)

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